अल्मोड़ा। नंदा राजजात यात्रा को लेकर जारी चर्चाओं के बीच नंदा देवी मंदिर समिति की ओर से बुधवार को नंदा देवी मंदिर प्रांगण में बैठक आयोजित की गई। बैठक में गढ़वाल के नौटी क्षेत्र की नंदा राजजात समिति द्वारा कुमाऊं पक्ष से बातचीत किए बिना यात्रा को स्थगित करने के निर्णय पर नाराजगी जताई गई। मंदिर समिति और कुमाऊं नंदा राजजात समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि कुमाऊं को विश्वास में लिए बिना लिया गया निर्णय परंपराओं की अनदेखी है। बैठक में बताया गया कि 75 वर्ष बाद वर्ष 2000 में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी और गढ़वाल पवार वंशज कुंवर बलवंत सिंह के आग्रह पर कुमाऊं ने नंदा राजजात में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की थी। कुमाऊं नंदा राजजात समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने कहा कि बिना चर्चा किए नंदा राजजात 2026 को स्थगित करने का निर्णय हास्यास्पद और तुगलकी फरमान जैसा है। उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार यात्रा 2026 में ही होनी चाहिए और इसी मुद्दे पर चंद्रवंशी युवराज नरेंद्र चंद्र राज सिंह के नेतृत्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शीघ्र वार्ता की जाएगी। मनोज वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद कुमाऊं नंदा राजजात समिति के अन्य जिलों के पदाधिकारियों की बैठक नंदा देवी मंदिर समिति अल्मोड़ा के नेतृत्व में आयोजित की जाएगी, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके। बैठक में कुमाऊं नंदा राजजात समिति के सचिव मनोज सनवाल, अनूप साह, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, अमरनाथ सिंह नेगी, हरीश सिंह भंडारी, अमित साह मोनू, अर्जुन बिष्ट, अभिषेक जोशी, रवि गोयल, गोविंद मेहरा, कुलदीप मेर, नमन बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
नंदा राजजात 2026 स्थगित करने के फैसले पर नंदादेवी मंदिर समिति ने जताया विरोध





