विकासनगर(आरएनएस)। पिछले कई सालों से शीशमबाड़ा स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट को हटाने के लिए संघर्ष कर रहे पछुवादून संयुक्त समिति ने साल के पहले दिन प्लांट के बाहर मौन धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने आसन नदी के अस्तित्व और पर्यावरण को बचाने के लिए प्लांट को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग की। समिति के सदस्यों का कहना था कि प्लांट हो हटाने के लिए कई बार डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक आश्वान दे चुके हैं, लेकिन आज तक कोई र्कावाई नहीं हो पाई है। दरअसल, शीशबाड़ा कूड़ा निस्तारण प्लांट सेलाकुई के साथ ही आसपास के करीब डेढ़ लाख से अधिक आबादी के लिए अभिशाप बन चुका है। प्लांट से उठने वाले दुर्गंध ने आसपास के लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। कूड़ा प्लांट के कारण यहां मौजूद आसन नदी का अस्तित्व भी खतरें में पड़ गया है। कूड़ा प्लांट से रिसने वाले कैमिकल युक्त पानी (लीचेड) सीधे आसन नदी में जा रहा है। जिससे यह नदी दूषित हो रही है। आसपास का वातावरण इससे दूषित हो रहा है। पछुवादून संयुक्त समिति पिछले कई सालों से कूड़ा प्लांट को अन्यत्र शिफ्ट करने लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस संबंध में वह एनजीटी तक में गुहार लगा चुके हैं। डीएम से लेकर मुख्यमंत्री भी कई बार शिफ्टिंग की बात कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और कूड़े का पहाड़ भी कम होने के बजाए बढ़ता जा रहा है। कूड़ा प्लांट से परेशान लोगों ने नए साल के पहले दिन कूड़ा प्लांट के बाहर मौन धरना प्रदर्शन किया। उनके हाथों में नारे लिखे तख्तियां थी। उनका कहना है कि जब तक प्लांट को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं जाता उनका आंदोलन जारी रहेगा। कहा इससे पूरे क्षेत्र का वातावरण भी दूषित हो रहा है। इस दौरान पछुवादून संयुक्त समिति के अध्यक्ष चैतन्य अनिल गौड़, प्रकाश भट्ट, अरुण शर्मा, राज गंगसारी, राय सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
शीशमबाड़ा प्लांट हटाने को लेकर किया मौन प्रदर्शन


