अल्मोड़ा। जिले की आशा फैसलिटेटरों ने मानदेय बढ़ाने और सेवा के नियमितीकरण की मांग को लेकर आवाज उठाई है। इस संबंध में उन्होंने भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रवि रौतेला को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ज्ञापन में बताया गया कि उत्तराखंड में करीब 606 आशा फैसलिटेटर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत हैं। इनमें अधिकांश वर्ष 2006 से 2010 के बीच आशा कार्यकर्ता के रूप में सेवा दे चुकी हैं और बाद में उनकी योग्यता के आधार पर फैसलिटेटर के पद पर चयन हुआ। उन्होंने बताया कि उनके जिम्मे 15 से 30 आशा कार्यकर्ता और उतनी ही ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी होती है, जिसके तहत वे पूरे महीने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल 25 दिनों का मानदेय दिया जाता है, जो न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें राज्य प्रोत्साहन के रूप में मात्र 2000 रुपये मिलते हैं, जबकि आशा कार्यकर्ताओं को 3300 रुपये दिए जाते हैं। आशा फैसलिटेटरों ने पूरे माह के कार्य के अनुसार सम्मानजनक मानदेय देने, सेवा का नियमितीकरण करने, राज्य प्रोत्साहन राशि को 2000 से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह करने और बैठकों के भुगतान में वृद्धि करने की मांग रखी। साथ ही अलग पहचान के लिए यूनिफॉर्म का रंग अलग निर्धारित करने की भी मांग की गई। इस दौरान संगठन की जिला अध्यक्ष श्यामा रावत, उपाध्यक्ष ममता वर्मा, कोषाध्यक्ष रेखा आर्या, मुन्नी बिष्ट, प्रेमा बिष्ट, शांति नयाल, ममता बिष्ट, धनूली गोस्वामी, दीपा नयाल, हेमा शर्मा, रेखा पांडे, मंजू जोशी, कविता, नीमा सनवाल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
मानदेय बढ़ोतरी और नियमितीकरण को लेकर आशा फैसलिटेटरों ने उठाई आवाज





