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एसएसजे विश्वविद्यालय के वर्टिकल वर्मी कंपोस्टर डिजाइन को मिला पेटेंट

अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की ओर से विकसित ‘वर्टिकल वर्मी कंपोस्टर विद इंटीग्रेटेड बायोचार एंड एनवायरमेंटल मॉनिटरिंग’ डिजाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने पंजीकृत कर लिया है। इसे वर्मीकल्चर और ऑर्गेनिक खेती के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट के निर्देशन में तैयार इस डिजाइन को उनकी शोध टीम ने विकसित किया था। टीम में डॉ. राशि मिगलानी, अंकित कुमार, गौरव रावत, डॉ. नगमा परवीन, डॉ. पल्लवी सक्सेना और डॉ. महेंद्र सिंह राणा शामिल रहे।

शोधकर्ताओं के अनुसार यह प्रणाली वर्टिकल वर्मीकम्पोस्ट, बायोचार और इंटीग्रेटेड मॉनिटरिंग तकनीक का संयोजन है, जो कम जगह में अधिक उपजाऊ जैविक खाद तैयार करने में सक्षम है। इसमें लगे सेंसर मिट्टी की नमी और तापमान की निगरानी करते हैं, जबकि बायोचार पोषक तत्वों को बढ़ाकर कार्बनिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह तकनीक ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने में उपयोगी साबित होगी। पेटेंट मिलने पर कुलपति समेत शोध दल के सदस्यों ने खुशी जताई है।