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भविष्य की चिंताओं को देखते हुए अभी से करनी होगी तैयारी: हरीश रावत

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देहरादून(आरएनएस)।  पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के साथ बहुत बड़ी राष्ट्रीय अपेक्षाएं भी जुड़ गई थीं। अपेक्षा थी कि आतंकवाद का फन हमेशा के लिए कुचल दिया जाएगा। पीओके जिस पर कुंडली मारकर विषैले नाग की तरह पाकिस्तान बैठा है, उसे भारत का हिस्सा बना लिया जाएगा। उन्होंने बांग्लादेश युद्ध की यादों को ताजा करते हुए उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका को भी याद किया। ऑपरेशन सिंदूर पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार साझा करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि इस समय इंदिरा गांधी बहुत याद आ रही हैं। बांग्लादेश युद्ध के दौरान जब अमेरिका ने सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी की ओर भेज दिया था।
तब इंदिरा, जनरल मानेकशॉ सहित भारतीय सेना के कदम तेजी से ढाका की ओर बढ़ रहे थे। यह सुनिश्चित हो गया था कि ढाका पर बंग वाहिनी का झंडा फहराने जा रहा है। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन ने सारी शक्ति लगा दी थी कि किसी तरीके से इंदिरा से बात हो जाए। बात तब हुई, जब ढाका पर बंग वाहिनी का झंडा लहरा दिया गया और जनरल नियाजी सहित पाकिस्तान की फौज ने आत्मसमर्पण कर दिया। रावत ने कहा कि काश, इस बार भी कुछ ऐसा ही हो जाता। उन्होंने कहा बावजूद इसके हम सब सरकार के साथ हैं। सांसदों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल दुनिया को भारत का पक्ष बताने भी जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बांग्लादेश सरकार के रूप में एक नया नासूर हमारे पूर्वोत्तर में उभर करके सामने आ गया है। अवामी लीग और शेख हसीना का नॉर्थ ईस्ट की शांति, सद्भावना और विकास में अप्रत्यक्ष तौर पर अभूतपूर्व योगदान था, क्योंकि उन्होंने अपनी धरती पर भारत विरोधी शक्तियों और नॉर्थ ईस्ट के आतंकी संगठनों को उभरने नहीं दिया। उन्होंने नेपाल को लेकर भी चिंता जताई। कहा कि नेपाल कब तक तटस्थ रहेगा, कहा नहीं जा सकता है। जिस दिन नेपाली कांग्रेस सरकार से अलग हो जाएगी तो वहां की कम्युनिस्ट पार्टियों का रुख फिर चीन समर्थक हो सकता है। खतरा कुछ समय के लिए टला है। चीन और तुर्किया, गैर जिम्मेदार पाकिस्तान को फिर से और भंयकर अस्त्र-शस्त्र दे सकते हैं। चीन ने जो रक्षा प्रणाली अमेरिका से टकराव की स्थिति के लिए बनाई है, उसे वह पाकिस्तान को दे सकता है। हमारी सीमाओं के साथ-साथ आतंकवाद का खतरा यथावत बना हुआ है। हमें भविष्य की ऐसी स्थिति का सामना करने के लिए अपने आपको तैयार करना चाहिए। आवश्यकता पड़े तो हाइड्रोजन बम भी बनाना चाहिए और वायु रक्षा प्रणाली को और ज्यादा पैना व सुदृढ़ किया जाना चाहिए। इसके साथ ही नेवी की शक्ति को भी दुगना किए जाने की आवश्यकता है।