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नए साल के व्रत त्यौहारों के भ्रम का निराकरण करेगी विद्वत सभा

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देहरादून(आरएनएस)। उत्तराखंड विद्वत सभा साल 2026 में सनातन धर्म के व्रत, पर्व-त्यौहारों को लेकर भ्रम निराकरण के प्रयास में जुट गई है। इसी सिलसिले में आगामी 20 दिसंबर को ट्रांसपोर्टनगर रोड शिमला बाईपास में ज्योतिषीय विचार विमर्श विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया गया है। उत्तराखंड विद्वत सभा पिछले कुछ वर्षों से व्रत त्यौहारों पर बढ़ता जा रहे असमंजस को दूर करने के लिए लगातार प्रयासरत है। गत वर्ष और इस वर्ष भी ये प्रयास किए थे। लेकिन सभी पंचांगकर्ताओं और ज्योतिषविदों में व्रत, पर्व की तिथि को लेकर स्पष्ट राय नहीं बन पा रही थी। वहीं सरकारी कैलेंडर जारी होने से लोगों में असमंजसता को बढ़ावा मिल रहा था। सभा अध्यक्ष आचार्य हर्षपति गोदियाल ने बताया कि इस विमर्श में सभी ज्योतिष विद, धार्मिक संगठन औ पंचांगकर्ता एक राय बनाकर सरकारी कैलेंडर के लिए सुझाव देंगे। प्रवक्ता आचार्य विपिन चंद्र डोभाल ने बताया कि, वर्ष 2026 में भी कुछ व्रत त्यौहार को लेकर स्पष्टता नहीं है। बैठक में इसी बिंदु पर बात की जाएगी। बैठक ट्रांसपोर्टनगर रोड स्थित सांई गेस्ट हाउस में होगी। 16 दिसंबर से खरमास देहरादून, खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर से हो रही है। यह सूर्यदेव की आराधना का विशेष समय है। माना जाता है कि इस माह सूर्य देव की पूजा करने से सुख समृद्धि का आर्शीवाद मिलता है। खरमास में विवाह, अन्य मांगलिक कार्य पर भी रोक लग जाएगी। ज्योतिषाचार्य डॉ.सुशांतराज ने बताया कि, सूर्यदेव जब धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तभी से खरमास की शुरुआत होती है। माना जाता है कि इस दौरान सूर्य की ऊर्जा में कमी आ जाती है। खरमास 14 जनवरी तक रहेगा।