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उत्तराखंड पुलिस में सिपाही ने लिख डाला उपन्यास

देहरादून(आरएनएस)।  उत्तराखंड पुलिस में सेवारत यमनोत्री के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली निवासी राजकुमार पंवार के उपन्यास अब हुआ सवेरा का विमोचन पिछले दिनों सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में राज्यपाल लेज.(सेनि.)गुरमीत सिंह द्वारा किया गया। राज्यपाल ने राजकुमार पंवार के लेखन की प्रशंसा करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया है। राजकुमार पंवार ने बताया कि उनका यह उपन्यास स्मैक जैसे सूखे नशे की गिरफ्त में आ रही युवा पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए लिखा गया है। यह एक ऐसा नशा है जिसमें माता पिता को पता नहीं लगता कि उनका बेटा नशे की गिरफ्त में आ चुका है। जब बेटा चोरी चकारी, लूटपाट जैसे अपराधों में संलिप्त होता है तब माता पिता को पता चलता है कि उनका बेट ड्रग्स के जाल में फंस चुका है। इसलिए यह उपन्यास किसी भी माता पिता के लिए बेहद जरुरी है। उपन्यास के जरिए उन्होंने बताया कि कैसे स्मैक जैसे नशे से युवाओं को बाहर निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि पुलिस में रहते हुए उन्होंने अनेक मौकों पर ऐसी घटनाओं को देखा जिसमें शहर में अपराधिक घटनाओं में किस तरह स्मैक के आदि हो चुके युवा जुड़े हुए हैं। आए दिन चोरी, चैन स्नेचिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दे कर अपने परिजनों के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। यहीं सोच कर उन्हें यह उपन्यास लिखने की सोची। उत्तराखंड भाषा संस्थान की अनुदान योजना से उनकी यह पुस्तक प्रकाशित हुई है। पुस्तक विमोचन के मौके पर मौजूद अति विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य वक्ता पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी, राजपुर रोड विधायक खजानदास, उत्तराखंड भाषा संस्थान की निदेशक स्वाति भदौरिया, वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष पंत ने भी पुस्तक के शिल्प की प्रशंसा की है। पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने पुस्तक के संदर्भ में लिखा है कि लेखक ने पर्वतीय अंचल की सामाजिक, आर्थिक चुनौतियों को उपन्यास के माध्यम से उजागर किया है। उपन्यास सभी श्रेणी के पाठकों के लिए रोचक है।