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मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम ढौरा को ‘मशरूम ग्राम’ बनाने की पहल

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अल्मोड़ा। मोहन उप्रेती लोक संस्कृति, कला एवं विज्ञान शोध समिति और उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के मानसखंड साइंस सेंटर, अल्मोड़ा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य समापन शुक्रवार देर शाम पारंपरिक झोड़ा नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ। समापन समारोह में वरिष्ठ वैज्ञानिक जी. सी. एस. नेगी और एस. एस. सामंत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागी महिलाओं के साथ अपने अनुभव साझा किए और मशरूम उत्पादन के वैज्ञानिक, आर्थिक और पोषण संबंधी पहलुओं पर प्रकाश डाला। डॉ. नेगी ने इसे कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय बताया, जो खासकर पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन सकता है। वहीं, डॉ. सामंत ने मशरूम की पौष्टिकता और स्वास्थ्यवर्धक गुणों की जानकारी देते हुए महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में ग्राम ढौरा के ग्राम विकास अधिकारी मनीष रावत ने प्रतिभागियों को भविष्य में हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। संस्था के सचिव कमल पांडे ने बताया कि समापन अवसर पर प्रतिभागी महिलाओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक झोड़ा नृत्य ने स्थानीय लोकसंस्कृति और कृषि विज्ञान के सुंदर समन्वय को दर्शाया। मशरूम प्रशिक्षिका नमिता टम्टा ने ग्राम ढौरा को ‘मशरूम ग्राम’ घोषित करने की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में नई राह मिल सकती है। कार्यक्रम में पंकज कुमार, कविता ढैला, पूर्व ग्राम प्रधान राजेन्द्र अधिकारी समेत कई गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं।