अल्मोड़ा। नगर निगम क्षेत्र की समस्याओं को लेकर नगर आयुक्त सीमा विश्वकर्मा की ओर से आयोजित जनसुनवाई में नागरिकों का आक्रोश साफ नजर आया। लोगों ने कहा कि नगर निगम बने एक साल हो गया, लेकिन शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। नागरिकों ने यह भी कहा कि पर्यटन नगरी का सपना दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में सुविधाएं बेहद कमजोर हैं। बैठक में कई लोगों ने निगम की आय और शहर के विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विकास कार्यों में नगर निगम को ही प्रमुख कार्यदायी संस्था बनाया जाना चाहिए। जनसुनवाई में पेयजल लाइनों को गंदे नालों से हटाने की मांग सबसे अधिक उठी। नागरिकों का कहना था कि नालियों और सीवर के पास से गुजर रही पानी की लाइनों से दूषित पानी घरों तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। लोगों ने भवन के आकार के आधार पर पानी का बिल तय किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि बिल वसूली खपत के आधार पर होनी चाहिए। इसके अलावा खराब स्ट्रीट लाइट बदलने, खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत, शहर में सीसीटीवी लगाने और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने जैसे मुद्दे भी बैठक में प्रमुखता से उठे। बैठक में रवि रौतेला ने कहा कि नगर निगम की आय बढ़ेगी तभी विकास कार्य आगे बढ़ पाएंगे। उन्होंने बताया कि नगर पालिका के समय बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और पार्किंग क्षेत्रों में कई दुकानें खाली पड़ी हैं, जिससे निगम को लगातार नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्किंग से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्सा जिला प्राधिकरण में चला जाता है। अरुण वर्मा ने नगर निगम के कार्य दूसरे विभागों या संस्थाओं को सौंपने पर आपत्ति जताई और कहा कि शहर की सड़कों पर प्रमुख जगहों पर रोशनी की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही बाजारों में दिशा-निर्देश वाले साइन बोर्ड लगाने की मांग भी रखी गई। रमेश जोशी, सुशील शाह, वैभव पांडे और रोहित कार्की ने कहा कि नालों के भीतर से गुजर रही पानी की लाइनों को जल्द हटाया जाए, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो। लोगों ने एनटीडी के ट्रेंचिंग ग्राउंड में खुले में पड़े हजारों मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई। बैठक में नगर प्रमुख अजय वर्मा, सहायक नगर आयुक्त लक्ष्मण सिंह भंडारी, पार्षद और नगर के कई नागरिक उपस्थित रहे।
नगर निगम गठन के एक साल बाद आयोजित जनसुनवाई में नगर प्रमुख अजय वर्मा और नगर आयुक्त सीमा विश्वकर्मा को जनता के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। नागरिकों ने अंडरग्राउंड कूड़ेदान नहीं बनने, बंदरों की समस्या जस की तस रहने, गली-मोहल्लों में रोशनी का अभाव, शौचालयों की बदहाल स्थिति, सीसीटीवी नहीं लगने और जल निकासी की खराब व्यवस्था जैसे मुद्दों पर नाराजगी जताई। नगर प्रमुख और नगर आयुक्त ने भी स्वीकार किया कि कई काम तय समय पर नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि शहर में नागरिक सुविधाएं बढ़ाना नगर निगम की प्राथमिकता है और बजट की व्यवस्था कराते हुए जनता के सहयोग से शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जाएगा। बैठक में कई पार्षदों की गैरहाजिरी भी चर्चा का विषय रही, जबकि कुछ पार्षदों ने बैठक से पहले राय न लिए जाने पर नाराजगी जताई।







