अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, हवालबाग में 22 से 24 जुलाई तक औषधीय मशरूम खेती पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों, विशेषकर महिला कृषकों, को मशरूम की वैज्ञानिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार और आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में अल्मोड़ा जिले के 10 विकासखंडों से आई 29 महिला कृषकों ने भाग लिया। मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में बटन, ऑयस्टर और औषधीय मशरूम की खेती से जुड़ी वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक कंपोस्ट तैयार करना, स्पॉन उत्पादन, बैग भरना, केसिंग मिट्टी तैयार करना, रोग एवं कीट प्रबंधन, कटाई के बाद रखरखाव, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और विपणन सहित विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही गैनोडर्मा, शिटाके और कॉर्डिसेप्स जैसे औषधीय मशरूम की खेती की तकनीकों से भी अवगत कराया गया। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. गौरव वर्मा ने मशरूम उत्पादन को ग्रामीण आजीविका और पोषण सुरक्षा का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसके बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। फसल उत्पादन प्रभाग के प्रमुख डॉ. बृज मोहन पांडे ने कहा कि वैज्ञानिक मशरूम खेती पर्वतीय क्षेत्रों में आय सृजन और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है। समापन सत्र में निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में सीखे गए ज्ञान का उपयोग कर मशरूम आधारित उद्यम स्थापित करने का आह्वान किया। डॉ. पी.के. मिश्रा ने संस्थान की ओर से भविष्य में भी तकनीकी मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रशिक्षण के सफल संचालन में डॉ. पी.के. मिश्रा, डॉ. गौरव वर्मा और डॉ. रमेश सिंह पाल की प्रमुख भूमिका रही।
औषधीय मशरूम खेती का प्रशिक्षण संपन्न, 29 महिला कृषकों ने सीखी वैज्ञानिक तकनीक





