अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से सोमवार को हवालबाग विकासखंड के घनेली गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में 16 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 12 महिलाएं और चार पुरुष शामिल रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. अमित ठाकुर और डॉ. रविशंकर ने किया। कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के महत्व की जानकारी दी गई। विशेष रूप से पशुओं के गोबर के वैज्ञानिक प्रबंधन, उचित भंडारण और उससे गुणवत्तायुक्त जैविक खाद तैयार करने पर जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि गोबर को उचित स्थान पर एकत्रित कर सुरक्षित तरीके से भंडारित करना चाहिए, ताकि वर्षा के पानी से पोषक तत्वों का नुकसान कम हो सके। वैज्ञानिकों ने बताया कि गोबर को उचित तरीके से सड़ाकर तैयार की गई जैविक खाद खेतों में इस्तेमाल करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है। इससे मिट्टी की संरचना और जल धारण क्षमता में सुधार होता है। इसके साथ ही किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन करने और रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने सिंचाई के लिए पर्याप्त जल संसाधनों की कमी और जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान जैसी समस्याएं भी साझा कीं। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
किसानों को गोबर से जैविक खाद बनाने और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की दी जानकारी-









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