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फल एवं खाद्य प्रसंस्करण पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

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अल्मोड़ा। विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में फल एवं खाद्य प्रसंस्करण द्वारा मूल्य संवर्धन विषय पर पांच दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। प्रशिक्षण का आयोजन 15 से 19 जून तक अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना–कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत किया गया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. मनोज कुमार ने किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को संस्थान की शोध गतिविधियों और विकसित कृषि यंत्रों की जानकारी दी गई। तकनीकी सत्रों में जूस, स्क्वैश, जैम, जेली और टमाटर सॉस निर्माण की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण में अचार निर्माण, सोया दूध और टोफू बनाने की विधियों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। निधि सिंह ने इन विषयों पर प्रशिक्षण दिया, जबकि उद्यान विभाग के अविनाश ने प्रतिभागियों को जैम और जेली निर्माण की उन्नत तकनीकों से अवगत कराया। प्रतिभागियों को फल एवं सब्जियों के संरक्षण के लिए सुखाने की तकनीक, पैकेजिंग, लेबलिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन से संबंधित जानकारी भी दी गई। व्यावहारिक अनुभव के लिए उन्हें उद्यान विभाग के किसान प्रसंस्करण केंद्र तथा हवालबाग स्थित एकीकृत आजीविका परियोजना का भ्रमण कराया गया, जहां विभिन्न प्रसंस्करण यंत्रों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में रामगढ़ क्षेत्र के दाड़िमा गांव से 10 और हवालबाग के उड्यारी गांव से एक सहित कुल 11 अनुसूचित जाति वर्ग के कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. मनोज कुमार और डॉ. कुशाग्रा जोशी ने किया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन कर उन्हें प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा प्रशिक्षण के दौरान तैयार उत्पाद भी भेंट किए गए।

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