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उत्तराखंड में बाजार की मांग के मुताबिक बदलेंगे कौशल विकास के कोर्स

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देहरादून(आरएनएस)। बाजार की मांग के अनुसार उत्तराखंड में युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कौशल विकास, फॉरवर्ड लिंकेज पर बुधवार को सचिवालय में हुई कौशल विकास की समीक्षा बैठक में तकनीकी पाठ्यक्रमों को समयानुसार रिवाइज किए जाने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में इस तथ्य पर गहन चर्चा हुई कि राज्य में आईटीआई, तकनीकी संस्थानों और प्रशिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद उद्योगों में उनकी प्लेसमेंट और संतोषजनक वेतन न मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रबंधन, समन्वय और प्लेटफार्म स्तर पर कमी का संकेत बताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। कहा कि एक ओर नाईं, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मिस्त्री, कारपेंटर जैसे दैनिक कार्यों के लिए कुशल श्रमिक आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। वहीं दूसरी ओर अनेक युवा जो आईटीआई से तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, वे बेरोजगार हैं। उन्होंने तकनीकी, शिक्षा, कौशल और अन्य संबंधित विभागों के बेहतर समन्वय से इस विरोधाभास को दूर करने के निर्देश दिए। निर्देश दिए कि केवल स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि स्मार्ट मानव संसाधन तैयार करना प्राथमिकता हो। उद्योगों और भविष्य की तकनीकी मांग के अनुरूप रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित ट्रेनर-शिक्षक और आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों को अपग्रेड किया जाए। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उद्योगों को ट्रेनिंग में भागीदार बनाने का सुझाव दिया। यदि उद्योग भी प्रशिक्षण और तकनीकी पाठ्यक्रम के निर्धारण में शामिल होंगे तो वे उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को स्किल्ड कर पाएंगे। इससे युवाओं को जॉब पाने के अधिक अवसर मिलेंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी संबंधित विभागों को एक प्लेटफार्म पर आकर रोजगार, कौशल से जुड़े कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, हॉफ वन विभाग रंजन मिश्रा, सचिव दिलीप जावलकर, रंजीत सिन्हा, रविनाथ रामन, विनय शंकर पांडेय, दीपेंद्र चौधरी, डीएस गर्ब्याल, सी रविशंकर आदि मौजूद रहे। विदेशों में भी बढ़ाया जाए रोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशों में स्वरोजगार, रोजगार के अवसरों को चयनित किए जाने वाले युवाओं को केंद्र की विभिन्न देशों के अनुरूप प्रबंधन के संबंध में गाइड लाइन साझा की जाए। ताकि उनको संबंधित देश में अपने आपको एडजस्ट करने में आसानी हो। सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और न्यायालय में लंबित प्रकरणों का प्रभावी निस्तारण किया जाए। ताकि भर्ती परिणाम अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।