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डायट में शिक्षकों को पारंपरिक खेलों से शिक्षण के तरीके सिखाए

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अल्मोड़ा। वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2025-26 के अंतर्गत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्राथमिक विद्यालयों के 40 शिक्षकों के लिए बाल केंद्रित शिक्षण सामग्री पर आधारित पांच दिवसीय कार्यशाला 9 से 13 मार्च तक आयोजित की जा रही है। यह कार्यशाला उन विद्यालयों के शिक्षकों के लिए है जहां आंगनबाड़ी केंद्र संचालित नहीं हैं। कार्यशाला के चौथे दिन की शुरुआत प्रार्थना सभा और पिछले दिवस की आख्या के साथ हुई। पहले सत्र में संदर्भदाता डॉ. कामाक्षा मिश्रा ने प्रतिभागियों को स्थानीय और पारंपरिक खिलौनों तथा खेलों से संबंधित कठपुतली आधारित शिक्षण सामग्री के निर्माण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद प्रतिभागियों को सात समूहों में विभाजित कर स्थानीय और पारंपरिक खिलौनों व खेलों पर आधारित कठपुतली शिक्षण सामग्री तैयार कर उसका प्रस्तुतीकरण कराया गया। इस दौरान डॉ. दीपा जलाल, हरिवंश सिंह बिष्ट और डॉ. नीलेश कुमार ने पर्यवेक्षक के रूप में प्रतिभागियों को आवश्यक सुझाव दिए। तीसरे सत्र में डॉ. कामाक्षा मिश्रा ने रचनात्मक और नवाचार आधारित अधिगम सामग्री निर्माण के लिए प्रतिभागियों को विभिन्न समूहों में विभाजित कर स्थानीय व पारंपरिक खिलौनों और खेलों पर आधारित शिक्षण सामग्री तैयार कराई। कार्यशाला का संचालन समन्वयक रमेश सिंह रावत ने किया, जबकि अध्यक्षता डायट के प्राचार्य ललित मोहन पांडे ने की। इस अवसर पर डॉ. हेम चंद्र जोशी, प्रियांशु चंद्र, नवीन चंद्र, मीनू, विक्रम नेगी, रजत बिष्ट, घनश्याम तिवारी, वैभव तिवारी, माया रौतेला, जगदीश चंद्र, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, धीरज सिंह भाकुनी सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

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