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पर्वतीय कृषि में जैव उर्वरकों के उपयोग पर जोर, प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित

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अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के हवालबाग स्थित प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र में बुधवार को ‘जैव उर्वरकों द्वारा पोषक तत्व प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार’ विषय पर प्रशिक्षण एवं प्रायोगिक प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों सहित 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के निर्देशन में चल रहे ‘संतुलित उर्वरक उपयोग जागरूकता अभियान’ के तहत आयोजित कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार मिश्रा ने जैव उर्वरकों की भूमिका, पोषक तत्व प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य सुधार पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जैव उर्वरकों के नियमित उपयोग से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है, जिससे पौधों को पोषक तत्व बेहतर तरीके से उपलब्ध होते हैं और दीर्घकाल तक मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। उन्होंने संतुलित एवं समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को टिकाऊ कृषि की आधारशिला बताते हुए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ जैव आधारित प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को जैव उर्वरकों के प्रयोग की विधियों और फसलों में उनके लाभों की जानकारी देने के लिए प्रायोगिक प्रदर्शन भी कराया गया। इस दौरान मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्वों की कमी के लक्षण, उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग और पर्वतीय कृषि की परिस्थितियों में संतुलित पोषण प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने कहा कि किसानों को जैव उर्वरकों के सही उपयोग और खरीद के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति लगातार जागरूक करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का समापन खुली चर्चा और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।