अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा में जनजातीय गौरव दिवस के तहत आयोजित 15 दिवसीय कार्यक्रम के तीसरे दिन जनजातीय किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग की जानकारी दी गई। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के निर्देशन में मंगलवार को ऑनलाइन प्रशिक्षण एवं परिचर्चा आयोजित की गई। प्रशिक्षण में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मीणा ने मिट्टी के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों की जानकारी देते हुए मृदा परीक्षण का महत्व समझाया। उन्होंने मिट्टी के नमूने एकत्र करने की वैज्ञानिक विधि और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर पोषक तत्वों की उपलब्धता के अनुसार उर्वरकों के उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरकों के साथ गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता और फसल उत्पादकता में भी सुधार होता है। उन्होंने संस्थान में वर्ष 1973 से संचालित दीर्घकालीन उर्वरक प्रयोग का उदाहरण देते हुए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की उपयोगिता बताई। परिचर्चा में चमोली जिले के बम्पा गांव के प्रगतिशील किसान हरीश नेगी ने किसानों के लिए वर्मीकम्पोस्ट इकाइयां स्थापित करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम का समन्वय जनजातीय उपयोजना के नोडल अधिकारी डॉ. बीएम पांडेय ने किया। इसमें संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ विभिन्न जनजातीय गांवों के किसानों ने भी भाग लिया। वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर मिट्टी की सेहत एवं कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करें किसान, जनजातीय किसानों को दिया प्रशिक्षण








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