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हवालबाग में महिलाओं ने जैविक खेती से उगाए 16 क्विंटल आलू

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अल्मोड़ा। हवालबाग ब्लॉक में महिला समूहों ने जैविक खेती के जरिए आलू उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। हंस आजीविका परियोजना के तहत वितरित 200 किलोग्राम बीज से महिलाओं ने करीब 1500 से 1600 किलोग्राम तक जैविक आलू का उत्पादन किया है।

हंस आजीविका परियोजना, हवालबाग के अंतर्गत महिला समूहों को कुफरी ज्योति प्रजाति के प्रमाणित आलू बीज उपलब्ध कराए गए थे। महिलाओं ने पारंपरिक और पूरी तरह जैविक पद्धति से आलू की खेती की। परियोजना टीम के अनुसार इस बार उत्पादन सात से आठ गुना तक दर्ज किया गया।

फसल अवधि के दौरान महिलाओं को अनियमित मौसम, जंगली जानवरों से फसल नुकसान और अन्य क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। इसके बावजूद उत्पादन बेहतर रहा।

परियोजना से जुड़े विषय वस्तु विशेषज्ञ मोहित सिंह बिष्ट ने बताया कि सही बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और जैविक पद्धतियों के समन्वय से पहाड़ी क्षेत्रों में भी लाभकारी खेती संभव है। उन्होंने कहा कि यह सफलता क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग के बीच जैविक विधि से बेहतर उत्पादन मिलना सकारात्मक संकेत है। इससे मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के साथ किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

परियोजना की इस सफलता को हवालबाग क्षेत्र में जैविक आलू उत्पादन के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इससे अन्य महिला समूह भी जैविक खेती के लिए प्रेरित हो रहे हैं।