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जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्षरत रहे सोबन सिंह जीना

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अल्मोड़ा। जनसंघ के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री स्वर्गीय सोबन सिंह जीना की जयंती मंगलवार को उनके पैतृक गांव ढौल में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके जनसंघर्षों और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास में दिए गए योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि सोबन सिंह जीना जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समुदायों के अधिकारों के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने बेनाप भूमि को संरक्षित वन की श्रेणी में शामिल किए जाने का पुरजोर विरोध किया तथा वन पंचायतों के लिए अलग कानून बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना था कि सिविल वनों से होने वाली आय का उपयोग संबंधित गांवों के विकास और स्थानीय लोगों के हित में होना चाहिए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिनसर वन्यजीव विहार की स्थापना के विरोध में सोबन सिंह जीना ने सड़क से लेकर अदालत तक संघर्ष किया। उनका जीवन पर्वतीय समाज के अधिकारों और जनहित के मुद्दों के लिए समर्पित रहा। वक्ताओं ने कहा कि राज्य गठन के बाद जल, जंगल और जमीन से जुड़े कानून पहले की तुलना में अधिक कठोर हुए हैं। ऐसे में सोबन सिंह जीना के विचारों और जनसरोकारों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में लोक प्रबंध विकास संस्था के ईश्वर जोशी, कनिष्ठ प्रमुख निर्मल नयाल, वन पंचायत सरपंच ठाकुर सिंह भंडारी, मोहन सिंह भंडारी, बिशन सिंह, दीप्ति भोजक, हेमा देवी, सुशील कांडपाल, गीतांशु जोशी, किशन सिंह भंडारी, वीरेंद्र राम, अमित कुमार, डूंगर सिंह, बलवंत सिंह, इंद्र सिंह भंडारी, नंदी देवी आदि उपस्थित रहे।