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उत्तराखण्डः अटैचमेंट का खेल है बड़ा गजब का

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देहरादून (आरएनएस)।  राज्य में इन दिनों अटैचमेंट का खेल चरम पर है इसी का कारण है कि राज्य की तमाम व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। हालात यह हैं कि सबसे अधिक प्रभावित राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवायें हैं। इस राज्य की यह विडम्बना रही है कि जब से राज्य बना तब से यहां अटैचमेंट का खेल खत्म ही नहीं हो रहा है। हर कोई अपने आप को फर्स्‍ट दिखाने में लगा हुआ है और हालात यह है कि यदि किसी विभाग में एक अटैचमेंट होता है तो दूसरा विभाग दो कर देता है तो तीसरा तीन, ऐसे में यह गेम खत्म ही नहीं हो रहा है। इस खेल से सबसे अधिक प्रभावित है शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग। हो क्या रहा है कि नौकरी पाने के लिए मास्टर हो या डाक्टर पहाड़ जाने में नहीं हिचकता है लेकिन जैसे  ही नौकरी मिली वह वहां से निकलने की जुगत लगा लेता है, इसका सबसे आसान तरीका होता है अटैचमेंट जिसे कि उत्तराखण्ड की भाषा में जुगाड़ कहा जाता है। इसके लिए तन, मन और धन सभी तरह के हथियार इस्तेमाल किए जाते हैं। इस तरह के जुगाड़ यूं तो सभी सफल रहते हैं लेकिन एक प्रतिशत लोग ही ऐसे होते हैं जो कि इस जुगाड़ में सफल हो जाते हैं। इस राज्य में यह परम्परा सबसे आसान मानी जाती है कि नौकरी तो पहाड़ में है लेकिन ड्यूटी देहरादून में कर रहे हैं। इसके लिए यूं तो मंत्री तक का सफर तय करना होता है लेकिन दलालों की भूमिका इसमें कम नहीं होती है। राज्य में कई सरकारें आयी और चली गयी लेकिन ये अटैचमेट की जुगाड़ परम्परा कोई भी सरकार समाप्त नहीं कर सकी। बताया जा रहा है कि अब युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नजरें इस जुगाड़ के खेल पर टेढ़ी होती जा रही हैं और इसको लेकर शीघ्र ही बड़ा निर्णय लेने जा रहे हैं। बहरहाल अब देखना है कि इस जुगाड़ के खेल को कब तक यह राज्य और झेलता है।