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वन आच्छादन बढ़ाने और भूमि क्षरण नियंत्रण पर मंथन, धसपड़ में पायलट परियोजना शुरू होगी

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अल्मोड़ा। जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में वन एवं वृक्ष आच्छादन बढ़ाने, भूमि क्षरण नियंत्रण और आजीविका संवर्धन को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारत-जर्मन तकनीकी सहयोग परियोजना रिकैप फोर एनडीसी के तहत संभावित विकास कार्यों पर गहन चर्चा की गई। बैठक में जिला समन्वय समिति के सदस्य, विषय विशेषज्ञों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजना के तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान वन आच्छादन में वृद्धि, भूमि क्षरण की रोकथाम, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर जोर दिया गया। आईयूसीएन द्वारा उत्तराखंड में 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसके तहत अल्मोड़ा में धसपड़, नौगांव और चितई पंत को प्राथमिकता दी गई है। बैठक में जागेश्वर रेंज के धसपड़ गांव में पायलट परियोजना शुरू करने पर सहमति बनी। जिलाधिकारी ने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य वन संरक्षण और वनावरण में वृद्धि करना है तथा स्थानीय लोगों को इसके लाभ से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने ग्राउंड स्तर पर कार्बन प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता जांचने के निर्देश भी दिए। जिलाधिकारी ने चयनित क्षेत्रों में आजीविका गतिविधियों की स्पष्ट और व्यावहारिक रूपरेखा तैयार करने तथा कार्यों को परिणाम आधारित बनाने के निर्देश दिए। साथ ही इन कार्यों के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में जानकारी दी गई कि रिकैप फोर एनडीसी एक भारत-जर्मन तकनीकी सहयोग परियोजना है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2029 तक 4 लाख हेक्टेयर से अधिक निम्नीकृत वन क्षेत्रों का पुनर्स्थापन करना है। यह परियोजना वन परिदृश्य पुनर्स्थापन के माध्यम से आजीविका सुधार, जैव विविधता संरक्षण और राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह, सिविल सोयम प्रभाग के प्रदीप धौलाखंडी, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, परियोजना निदेशक डीआरडीए एन तिवारी, परियोजना की राज्य सलाहकार अपर्णा पांडे, आईयूसीएन से दीपिका क्षेत्री सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।